योगेश्वर
श्रीकृष्ण ने बताया कि,
जिन तपस्वी
आत्माओं नें यतियों ने अपने आप को इच्छा और क्रोध से मुक्त कर लिया है, जिन्होने अपने मस्तिष्क को वश में कर लिया है और
जिन्होने अपनी आत्मा को जान लिया है, परमात्मा का परम् आनंद ब्रम्हनिर्वाण उनके निकट ही विराजमान रहता है । वे
आत्मा की चेतना में जीवन जीते रहते हैं । यहाँ इस संसार में आनंदमय जीवन का यही
वास्तविक स्वरूप होता है ।
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