योगेश्वर
श्रीकृष्ण ने बताया कि जो सुख मनुष्य प्रकृति के मोंह से पाता है वह वास्तविकता
में उसके दु:ख का कारण बनता है । ऐसे सुख समय की सीमाओं से बँधे होते हैं । ऐसे
सुखों का कहीं प्रारम्भ व कहीं अंत होता है । इसलिये कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति ऐसे
सुखों के मिलने पर हर्षित नहीं होता है । ऐसे सुख मनुष्य की अपनी इच्छाओं की
पूर्ति होने पर प्राप्त होते है और उनके समाप्त हो जाने पर उनके आभाव का दु:ख उसे
सताता है । इस प्रकार वे दु:ख के निमित्त बनते हैं ।
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