रविवार, 6 अप्रैल 2014

ब्रम्हनिर्वाण

योगेश्वर श्रीकृष्ण ने बताया कि जो मनुष्य अपना सुख अपने अंत:करण में निहित पाता है । जो मनुष्य समस्त खुशियाँ अपने अंत:करण में अनुभव करता है । जो मनुष्य ज्ञान को अपने अंत:करण में पिरोया अनुभव करता है । ऐसा समस्त अनुभव करने वाले मनुष्य का ब्रम्ह के साथ एकीकरण हो जाता है । ऐसे मनुष्य की दशा ब्रम्हनिर्वाण कही जाती है । ब्रम्हनिर्वाण की स्थिति पूर्ण ज्ञान और पूर्ण आत्मनियंत्रण की एक परिभाष्य दशा है । यह मात्र क्षणिक अनुभव नहीं है । इस ब्रम्हनिर्वाण की दशा को प्राप्त योगी ब्रम्ह में लीन ब्रम्ह का ज्ञानी ब्रम्ह में जीवन जीता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें