मंगलवार, 22 अक्टूबर 2013

प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण 
इस सृष्टि में ज्ञेय केवल परम ब्रम्ह है । परम ब्रम्ह को जानना ही ज्ञान है । परम ब्रम्ह को जानने के लिये जो पथ अपनाये जाते है उन्हे भी ज्ञान ही कहा जाता है । 
ज्ञान पाने के लिये स्वयं साधक को यत्न करने होंगे । ज्ञान प्राप्त हो जाने पर परम आनंद की स्थिति का भोग भी साधक ही कर सकेगा । 
ज्ञान पाने के जिज्ञासु की साधना का प्रारम्भिक द्वार है - भजन 
परम ब्रम्ह समस्त सृष्टि के कण कण में व्याप्त है - नारायण 
यात्रा प्रारम्भ करें अवष्य परम पद तक पहुँचेगे - यह विश्वास रखें 
प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण नारायण नारायण प्रभु नारायण श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण प्रभु नारायण प्रभु नारायण

1 टिप्पणी:

  1. Path of attaining Brahm through wisdom (Gyan) and through Bhakti are two different paths, as I have been told or given to understand. From what you have written seems to merge the two paths.

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